नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज स्टीव वॉ की क्रिकेट को लेकर खींची गयी तस्वीरों की एक प्रदर्शनी इस माह के अंत में आस्ट्रेलिया के सिडनी में लगायी जाएगी। इसमें वॉ की खींची गयी तस्वीरों में 70 से अधिक की इस महीने के आखिर में सिडनी में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा, ‘भारत ने मुझे यादें ही नहीं दी उसने मुझे जिंदगी बदलने वाले क्षण दिखाए। इस प्रदर्शनी के दौरान हिमालय की किसी तलहटी में भिक्षुओं द्वारा क्रिकेट खेलने के साथ ही फिर दिव्यांग खिलाड़ी का गेंद पकड़ने के लिए निंजा वारियर्स की तरह हवा में तैरना दिखा है। वॉ के अनुसार भारत में क्रिकेट जिंदगी जीने का एक तरीका है। 
ऑस्ट्रेलिया के इस पूर्व कप्तान ने समुद्र तटों से लेकर रेगिस्तान और पहाड़ों पर लोगों को क्रिकेट खेलते हुए देखा है।  मुंबई के मशहूर आजाद मैदान पर धूल भरे मैदान पर कुछ नए सपने संजोकर बल्ला और गेंद थामे युवाओं ने भी वॉ को प्रभावित किया। वॉ ने आजाद मैदान के बारे में कहा, ‘वो स्थान क्रिकेट के लिए बना है और मुझे वह पसंद है। वे अद्भुत हैं, वे निंजा वारियर्स की तरह हवा में तैरते हैं। वॉ ने 18 दिन तक हाथ में कैमरा थामे हुए भारत का चक्कर लगाया। वो मुंबई से लेकर जोधपुर की गलियों में गए। उन्होंने कोलकाता की गलियां छानी तो राजस्थान के मरूस्थल और ऊंचे हिमालय की सैर पर भी गए। उनके इस दौरे पर एक वृत्त चित्र भी तैयार किया गया है जिसका शीर्षक है, ‘कैप्चरिंग क्रिकेट’। भारत में क्रिकेट पर बात करते हुए वॉ ने कहा, ‘भारत जैसे देश में क्रिकेट को कम करके आंकना मुश्किल है। वहां गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 80 करोड़ लोग हैं लेकिन क्रिकेट उन्हें कुछ खास से जुड़ने का मौका देता है। यह ऐसा खेल है जिसके लिए बहुत ज्यादा पैसा नहीं चाहिए। मेरे कहने का मतलब है कि क्रिकेट के लिए अक्सर कहा जाता है कि आपको खेलने के लिये सिर्फ बल्ला और गेंद चाहिए।’