बिलासपुर । राज्य के अभिवक्ता परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रभाकर सिंह चंदेल का कहना है कि निलंबित पटवारी और अधिवक्ता संतोष पांडेय आदतन अपराधी है, फ्रॉड है। अपने गुनाहों को छुपाने और बचने के लिए काला कोट पहन लिया है। एक फर्जी वकील 27 हजार असली वकीलों के बीच मे आ गया और प्रेक्टिस कर रहा है ये दुर्भाग्यजनक बात है। मैं अधिवक्ता परिषद के वर्तमान पदाधिकारियों से गुजारिश करना चाहता हूं कि उसके खिलाफ सख्त और जल्द करवाई करें, क्योकि वह ब्यक्ति एक मिनट के लिए भी बैंड पहनने का अधिकार नही रखता। श्रीचंदेल ने कहा कि संतोष पांडेय निलम्बित पटवारी, उसके खिलाफ अनेकों जांच चल रही है। इन्ही सबसे बचने के लिए ही उसने छलपूर्वक और गलत जानकारी देते हुए राज्य अधिवक्ता परिषद में अपना पंजीयन कराया है। पंजीयन कराते समय उसने शपथ पत्र में बताया है कि वो पटवारी थे लेकिन वीआरएस ले चुके है। जबकि वह पटवारी के पद से निलंबित हुए है, वह वीआरएस नही लिया है।उसके खिलाफ जांच चल रही है और हर महीने उसे 17261 रुपए जीवन निर्वाहभत्ता दिया जा रहा है। इस संबंध में संतोष पांडेय के खिलाफ हुई तो जांच में सही पाया गया है। राज्य अधिवक्ता परिषद के सामान्य सभा मे प्रस्ताव पारित किया गया था कि श्रीपांडेय का पंजीयन निरस्त किया जाय और उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाय। उसके खिलाफ करवाई होती इसके पहले हमारा कार्यकाल समाप्त हो गया। अभी विशेष समिति का गठन किया गया है आगे की करवाई विशेष समिति को करना चाहिए।
ऐसा ऑडियो या वीडियो है तो सार्वजनिक करे
श्री चंदेल से जब पूछा गया कि आप पर पैसे मांगने का आरोप लग रहा है तो उन्होंने कहा कि उनका ये आरोप पूरी तरह निराधार है। यदि इस संबंध में उनके पास कोई सबूत है, चाहे वो ऑडियो के रूप में हो या वीडियो के रूप में हो तो उसे सार्वजिक करे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अधिवक्ता परिषद के अध्यक्षो के खिलाफ षड्यंत्र करते रहते है। ये संतोष पांडेय उन्ही षडयंत्रकारियो के साथ जाके मिल गए है। ऐसे लोगो की संख्या 10 से 15 लोग ही है। इन्हें पूरा कोर्ट जनता है। 26 हजार अधिवक्ताओ ने मुझे अपना अध्यक्ष बनाया था। यदि उनका भरोसा मुझमे है तो ये चंद षड्यंत्रकारी लोग उनका कुछ नही बिगाड़ पाएंगे।