इस बार की महाशिवरात्रि पर शिव योग का निर्माण हो रहा है। जिस कारण इसे और अधिक शुभ माना जा रहा है। ऐसे में हर कोई यही सोचता है कि इस दिन के बवल शिव जी की पूजा करनी चाहिए। हालांकि यह विचार गलत नहीं। परंतु भगवान शंकर के अलावा अन्य देवता की अराधना की जा सकती है। हम बात कर रहे हैं न्यायधीश शनि देव की, जिन्हें कर्मफल दाता भी माना जाता है। जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जब ये शुभ होते हैं तो जातक को हर जगह से फायदा ही फायदा होता है, तो वहीं अगर इनकी स्थिति अशुभ हो तो व्यक्ति का जीवन कष्ट से भर देते हैं। तो आइए जानते हैं जब शनि का अशुभ फल हो तो जातक के जीवन में क्या होता है।

शनि अशुभ फल
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या के दौरान शनिदेव शुभ फल प्रदान नहीं करते हैं। जिस व्यक्ति पर इनकी साढ़ेसाती और ढैय्या होती है तो व्यक्ति को जॉब, करियर और बिज़नेस से जुड़ी परेशानियों के साथ-साथ सेहत संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है।

मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या
ज्योतिषी बताते हैं कि इस समय मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है, वहीं धनु राशि, मकर राशि और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है।

शनि उपाय
कहा जाता है ऐसे में शनिदेव की क्रूर दृष्टि से बचने के लिए जातक को भगवान शिव और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा हनुमान जी की पूजा तथा शनिवार को शनि का दान देना भी उत्तम माना जाता है।