हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है। अब इस साल शबरी जयंती कल यानी 5 मार्च 2021 (शुक्रवार) को मनाई जाने वाली है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं शबरी जयंती के शुभ मुहूर्त और कथा।

शबरी जयंती के शुभ मुहूर्त-

सप्तमी तिथि प्रारंभ- गुरुवार, 4 मार्च को रात 09 बजकर 58 मिनट से

सप्तमी तिथि समाप्त- 5 मार्च यानी शुक्रवार को शाम 7 बजकर 54 मिनट तक

शबरी जयंती कथा- रामायण में लिखा हुआ है भगवान राम की मुलाक़ात वनवास के दौरान शबरी से हुई था। जी दरअसल शबरी का असली नाम श्रमणा था, जो भील समुदाय से थी। शबरी का विवाह एक भील कुमार से हुआ था। कहा जाता है शबरी के पिता भील जाति के मुखिया थे और शबरी का हृदय बहुत निर्मल था। जिस दौरान शबरी का विवाह हुआ तो परंपरा के अनुसार पशुओं को बलि के लिए लाया गया। शबरी यह देखकर आहत हुईं और विवाह से ठीक एक दिन पूर्व घर छोड़कर दंडकारण्य वन में आकर निवास करने लगी। वन में मातंग ऋषि तपस्या किया करते थे। शबरी ऋषि की सेवा करना चाहती थी, लेकिन उन्हें लगता था कि वह भील जाति से है इसलिए उसे यह अवसर नहीं मिल पाएगा। शबरी सुबह जल्दी उठकर ऋषियों के उठने से पहले उस मार्ग को साफ कर देती थी जो आश्रम से नदी तक का जाता था। शबरी कांटे चुनकर रास्ते में साफ बालू बिछा देती थी।

शबरी यह सब चुपचाप करती थीं ताकि किसी को पता न चले। एक दिन शबरी को ऐसा करते हुए एक ऋषि ने देख लिया और उसकी सेवा से ऋषि बहुत प्रसन्न हुए। ऋषि मातंग का जब अंतिम समय आया तो उन्होंने शबरी को बुलाकर कहा कि वो अपने आश्रम में ही प्रभु राम की प्रतीक्षा करें, वे उनसे मिलने जरूर आएंगे। शबरी ऋषि की बात को मानकर भगवान राम का इंतजार करने लगी। रोज की तरह ही वह रास्ते को साफ करती। भगवान के लिए मीठे बेर तोड़कर लाती। मीठे बेर के लिए वह प्रत्येक बेर को चखकर एक पात्र में रखती। ऐसा करते हुए काफी वक्त गुजर गया। एक दिन शबरी को पता चला कि दो सुंदर युवक उसे ढूंढ रहे हैं, वे समझ गईं ये और कोई नहीं बल्कि उसके प्रभु राम ही हैं। प्रभु को आश्रम आता देख शबरी खूब प्रसन्न हुईं। शबरी ने भगवान राम के चरणों को धोकर और आसन दिय। इसके बाद वह जूठे बेर लेकर आई जो भगवान राम के लिए लाई थीं।