अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सैन्य अधिकारियों की पत्नियों ने कहा:बार-बार ट्रांसफर, पति की गैर मौजूदगी में बच्चों की परवरिश के बीच खुद की पहचान बनाना चुनौती

CDS की पत्नी मधूलिका रावत (बाएं), वायुसेना प्रमुख की पत्नी आशा भदौरिया (बीच में), सेना प्रमुख की पत्नी वीणा नरवणे (दाएं)।
CDS, सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख की पत्नियों ने महिला दिवस पर भास्कर को बताया कि वे कैसे अपने घर के साथ सैन्य परिवारों का ख्याल रखती हैं

छुट्टी पर सैनिक पिता के आने का इंतजार कर रहे बच्चों के सामने जब उनके पापा का शव तिरंगे में लिपटकर आता है, तो उन्हें संभालना दुनिया के सबसे मुश्किल कामों से एक होता है। ये ऐसा पल होता है, जब सैनिकों की पत्नियां खुद को जरूरत से ज्यादा मजबूत कर लेती हैं।

सामान्य घरों की महिलाओं की तुलना में सैनिकों की पत्नियों पर ज्यादा जिम्मेदारियां होती हैं। उन्हें बच्चों के लिए एक मां के साथ पिता का भी फर्ज निभाना पड़ता है। बच्चों की परवरिश के अलावा उन्हें पारिवारिक समस्याएं भी हल करनी होती हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भास्कर ने ​​​​​ CDS, सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख की पत्नियों से बात की। उन्होंने बताया कि वे कैसे अपने घर के साथ सैन्य परिवारों का खयाल रखती हैं।

मधूलिका, CDS जनरल विपिन रावत की पत्नी: CDS पद संवेदनशील, पेशे को हम निजी रिश्तों से अलग रखते हैं

मधूलिका कहती हैं- जब भी जनरल साहब राष्ट्रीय फर्ज निभाने बाहर जाते हैं, तो सुनिश्चित करती हूं कि घर में ऐसी घटना न हो जो उन्हें परेशान करे।

चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की पत्नी मधूलिका रावत ने कहा, ‘घर के सभी बड़े फैसले मिलजुल कर लेते हैं। उनकी व्यस्तता घरेलू मुद्दों में शामिल होने की मंजूरी नहीं देती है। मैं अपने आधिकारिक कर्तव्यों के अलावा घरेलू मोर्चे पर भी काम करती हूं।

ये दोनों भूमिकाएं एक-दूजे की पूरक हैं। सेना ने मुझे जीवन ने आत्मनिर्भर होना सिखाया है। जब भी जनरल साहब राष्ट्रीय फर्ज निभाने बाहर जाते हैं, तो सुनिश्चित करती हूं कि घर में ऐसी घटना न हो जो उन्हें परेशान करे। हम आशंकाओं और खुशी दोनों को साझा करते हैं।

जहां तक उनके जीवन में आने के बाद चुनौती का सवाल है, तो यही कहूंगी कि मैंने उनकी कठोर कलाइयों पर मुलायम दस्ताने पहनाने का काम किया है। अच्छे से पता है कि उनकी पोस्ट संवेदनशील है और राजनीति और सेना दोनों के दायरे में आती है। इसलिए पेशे को निजी रिश्तों से अलग रखते हैं। हम दोनों आधिकारिक गतिविधियों में संयुक्त भागीदारी से अपने लिए समय निकालने का प्रयास करते हैं।

दावे से कह सकती हूं कि हमारी जिम्मेदारियां हमारे जीवन में रंग भरने के लिए पर्याप्त हैं। सशस्त्र बलों में पत्नियों के कल्याण संघों की भूमिका बढ़ी है। इसने परिवार और पेशेवर जीवन की बढ़ती जटिलताओं और कोरोना से निपटने में भूमिका निभाई। ये परिवार और काम के बीच सेतु की तरह हैं। हमने वीर नारियों, परिवारों के बीच उद्यमिता की सुविधा दी है, जैसे कि नूतन, पंखुड़ी, उम्मीद, जाग्रति, तर्श, आरोही, सजनी जैसी पहल से वीर नारियों का स्किल डेवलपमेंट किया।'

वीणा, सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की पत्नी: ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैं काम में लगी हूं और वो आराम से टीवी देख रहे हों

वीणा कहती हैं कि उनके पति कभी चाय बनाने, सब्जियां लाने और बच्चों की नैपी बदलने तक से पीछे नहीं हटे।

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की पत्नी वीणा नरवणे ने बताया, "हम आपसी सहमति से निर्णय लेते हैं। जीवन में हर मोड़ चुनौती लाता है। जब युवा थे, तो सबसे बड़ी चिंता बेटियों की सुरक्षा, उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य की थी। बड़े होते गए तो वयस्क माता-पिता की सेहत और देखभाल ने जगह ले ली।

मैं कामकाजी थी, इसलिए हमारे बीच काम का बराबरी का बंटवारा हुआ। मुझे एक भी दिन याद नहीं जब मैं घर, रसोई और बच्चों के काम में लगी हूं और वह पैर पसारकर टीवी देख रहे हों। वह कई साल तक मोर्चे पर तैनात रहे, पर जब भी वे घर आते तो अपना पूरा ध्यान और समय हमें देते थे।

चाय बनाने, सब्जियां लाने और बच्चों की नैपी बदलने तक से वह पीछे नहीं हटे। हमने एक-दूसरे के व्यावसायिक या प्रोफेशनल निर्णयों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया। हमें खुश होने के लिए ज्यादा नहीं चाहिए। ताश या कैरम का एकाध गेम, बगीचे में छोटी सी वॉक, दिन की दिलचस्प घटनाओं का साझा करने या अच्छी किताब पढ़ने भर से हमें खुशी मिल जाती है। सेना एक बड़ा परिवार है।

सैनिक पत्नियों को बार-बार ट्रांसफर, पति की गैर मौजूदगी में बच्चों की परवरिश और अन्य पारिवारिक समस्याओं से अकेले जूझना पड़ता है। इसके बीच भी वे खुद की पहचान बनाना चाहती हैं। ऐसे में मेरा प्रयास है कि सभी जवानों की पत्नियों को हुनर तराशने और उन्हें सशक्त बनाने में मदद करूं। ऐसी बहनें जिनके पति वीरगति को प्राप्त हुए हैं, उनकी मदद में हमारी संस्था आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन सदा तत्पर है।'

आशा, वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया की पत्नी: हम जवानों की पत्नियों काे साइबर सजग बना रहे

आशा कहती हैं- जब कोई युवती वायु सैनिक से शादी करती है, तो उसे पता नहीं होता कि सैन्य जीवन होता कैसा है।

वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया की पत्नी आशा भदौरिया ने बताया, "हमारा समाज बहुत विकसित हुआ है। हमारी संगनियां ज्यादातर होममेकर हैं। इसलिए आपसी परामर्श के सत्र, पर्सनेलिटी डेवलपमेंट कार्यक्रम और साइबर जागरूकता के मॉडल से हम उन्हें कुशल बना रहे हैं।

इन मुद्दों पर हर महीने एक बैठक भी करते हैं। वायुसेना प्रमुख की पत्नी होने के नाते मुझ पर बड़ी जिम्मेदारी है। मैं ऐसी शख्स के तौर पर पहचानी जाना चाहती हूं, जो चुनौतियों से प्रेरित हो और एक साथ कई जिम्मेदारियां निभा पाए। जब कोई युवती वायु सैनिक से शादी करती है, तो उसे पता नहीं होता कि सैन्य जीवन होता कैसा है।

यहीं से हमारी भूमिका शुरू होती है। वायु सेना परिवार की सभी महिलाएं इस मामले में बेहद मिलनसार हैं और संकट में वे आपके साथ खड़ी हो जाती हैं। ये भावनात्मक सुरक्षा किसी भी महिला के लिए बड़ा संबल होता है। हमारे यहां महिलाओं को फील्ड ड्यूटी का अनुभव डेढ़ दशक से है और वायु सेना ने सही मूल्यांकन कर लड़ाकू भूमिका तक में शामिल कर लिया है।

गर्व से कहीं अधिक ये साहसिक फैसला था। रिटायर होने के बाद भी वायु सेना से रिश्ता नहीं टूटता। इस रिश्ते को संस्थागत बनाते हुए हमने देशभर में सात क्षेत्र बनाए हैं। महिलाएं संगिनी के तौर इसकी सदस्य हैं। होम मेकर के नाते होम केयर, बच्चों की परवरिश, पति को मानसिक मजबूती देना जैसे काम अहम हैं। इन कामों को मान्यता मिलनी ही चाहिए अन्यथा इससे मेंटल मेकअप बिगड़ता है। कुछ पश्चिमी देश होममेकिंग को प्रोफेशन का दर्जा देने की सोच रहे हैं।