बिलासपुर । शहरी निर्धन आवास योजना के हितग्राही को आबंटित आवास का 8 वर्षों के बाद भी कब्जा नहीं देने का मामला हाईकोर्ट सख्त:: निगम आयुक्त को निर्देश : आबंटन में घोलमाल ज् नाम निर्धन का आबंटन किसी दूसरे को कर दिया गया है। बिलासपुर के चांटीडीह के रहने वाले देवकुमार निर्मलकर ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मार्फत हाईकोर्ट में याचिका पेश की है कि उसे दिनॉक 28.05.2014 को शहरी निर्धन आवास योजनान्तर्गत ग्राम लिगियाडीह बिलासपुर में आवास क्रमांक के -04 आबंटित किया गया था , किन्तु उसका कब्जा उसको नहीं सौंपा गया था क्योंकि मौके पर किसी अन्य को कब्जा दे दिया गया था जिस पर याचिक काफी दिनों तक आयुक्त कार्यालय का चक्कर काटता रहा बाद में लगभग 06 वर्षों बाद पुनर - आबंटन आदेश पत्र दिनांक 15.10.2020 जारी कर आवास कमांक एन -01 को आवास कमांक के -04 के स्थान पर आबंटित किया गया , याचिकाकर्ता के द्वारा समस्त किश्तों की राशि भी जमा की जा चुकी है , परन्तु उक्त दूसरे आबंटित आवास पर भी किसी अन्य का कब्जा है जिस पर याचिक फिर आबंटित आवास क्रमांक एन -01 का कब्जा दिलाने आवेदनपत्र पेश कर उसे आबंटित आवास दिलाने गुहार किया । बाद में थक हार कर वह हाईकोर्ट में जनवरी 2021 को याचिका पेश किया तब हाईकोर्ट के जज गौतम भादुड़ी ने 22 जनवरी को याचिका को विचारार्थ स्वीकार कर आयुक्त एवं अन्य से जवाब तलब किया था जिसपर निगम के द बाद पूराने आवास के 04 का कब्जा देने कार्यवाही की गई प्रकरण में विगत 02 मार्च 2021 को पुन: सुनवाई करते हुये जज गौतम भादुड़ी ने याचिकाकर्ता को एन 01 आवास को क्यों आबंटित नही किया जा रहा है उसका कारण पूछते हुये निगम आयुक्त एवं अन्य उत्तरवादीगण को निर्देशित किया है कि उक्त आवास क्रमांक के .04 की वर्तमान हालत कोर्ट को बताने एवं याचिकाकर्ता को दिनॉक 15.10.2020 को आबंटित आवास एन 01 का कब्जा क्यों नहीं दिया जा रहा है बताने निर्देशित करते हुये आवास क्रमांक के 04 अथवा एन 01 को किसी अन्य को एलाट करने तथा आवास क्रमांक एन 01 के याचिकाकर्ता के आबंटन को निरस्त किये जाने संबंधी समस्त कार्यवाही पर रोक लगा दी है । प्रकरण में अगली सुनवाई अप्रैल 2021 के प्रथम सप्ताह में नियत की गई है । ज्ञातव्य हो कि निर्धनों को आबंटित आवास के स्थान पर मनमाने अन्य अपात्र लोगों को उन आवासों में बसाने एवं उन्हें काबिज करने का कार्य धड़ल्ले से होता रहा है जिसे रोकने जिम्मेदार अधिकारी कोई सार्थक कार्यवाही भी नही करते