धार्मिक शास्त्रों के अनुसार नवरात्रों के दौरान प्रत्येक वर्ष देवी मां विशेष सवारी करके आती हैं। बात करें इस बार की, तो पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2078 चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि, दिन मंगलवार के दिन शक्ति आराधना का पर्व आरंभ हो रहा है। ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार इस दिन चंद्र मेष राशि में गोचर करेंगे। तो वहीं रात्रि में सूर्य भी मेष राशि पर ही प्रवेश कर जाएंगे। दूसरी ओर इसी शुभ समय के अंतर्गत देवी मां घोड़े पर सवार होकर आने वाली हैं। बहुत सम लोह होते हैं जिन्हें इन्हें इस बारे में तो जानकारी होती हैं कि माता रानी विशेष वाहन पर आती हैं। मगर क्या आप जानते हैं कुछ खास योग के दौरान माता रानी नवरात्रि के खत्म होने पर जाती भी विशेष वाहव पर हैं। तो आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता और इस बार माता रानी कौन से वाहन पव वापिस लौटेंगी।

लेकिन इससे पहले जान लें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-
कलश स्थापना सुबह 10 बजकर 15 मिनट से पहले कर लेना अधिक शुभ रहेगा, क्योंकि उसके बाद द्वितीया तिथि लग जायेगी। मां के जो भक्त इस समय के मध्य कलशस्थापन न कर पाएं वे दोपहर को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट के मध्य कर सकते हैं।

बता दें इस वर्ष की तरह विगत वर्ष भी शारदीया नवरात्रि में भी देवी दुर्गा का वाहन अश्व ही था। शास्त्रानुसार मां प्रत्येक नवरात्रि पर्व के प्रथम दिन अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर अपने भक्तों को वरदान देने आती हैं उनके वाहन के अनुसार ही मेदिनी ज्योतिष के फलित का विश्लेषण किया जाता है।

इसके वर्णन किया गया है कि-
शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे च डोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता'।
गजे च जलदा देवी छत्र भंगस्तुरंगमे।
नौकायां सर्वसिद्धि स्यात डोलायां मरण ध्रुवम्।

अर्थात-
रविवार और सोमवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो मां दुर्गा का वाहन हाथी है जो अत्यंत जल की वृष्टि कराने वाला संकेत होता है।
शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो मां का आगमन घोड़ा (तुरंग) पर होता है जो राजा अथवा सरकार के परिवर्तन का संकेत देता है।
गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि का प्रथम दिन पड़े तो मां का आगमन डोली में होता है जो जन-धन की हानि, तांडव, रक्तपात होना बताता है। यदि नवरात्रि का शुभारंभ बुधवार हो तो मां दुर्गा 'नौका' पर विराजमान होकर आती हैं और अपने सभी भक्तों को अभीष्ट सिद्धि देती है।

इस प्रकार वर्तमान 13 अप्रैल मंगलवार से आरंभ होने वाले नवरात्रि के दिन मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर अपने भक्तों के घर आ रही हैं जो भक्ति की कठिन परीक्षा लेने वाली हैं। मां दुर्गा वापसी में हाथी की सवारी करके जाएंगी।

शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुजशोककरा।
शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करीविकला।।
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभवृष्टिकरा।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा।।

अर्थात-
रविवार और सोमवार को नवरात्रि का समापन हो तो मां भैंसा की सवारी से जाती हैं जिससे देश में रोग और शोक बढ़ता है।
शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का समापन हो तो मां मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जो दुख और कष्ट की वृद्धि करता है।
बुधवार और शुक्रवार को नवरात्रि का समापन होने पर मां की वापसी हाथी पर होती है जो अति वृष्टि सूचक है। गुरुवार को नवरात्रि समापन होने पर मां भगवती मनुष्य के ऊपर सवार होकर जाती हैं जो सुख और शांति की वृद्धि होती है। इस प्रकार मां के आने का वाहन अशुभ संकेत दे रहा है जबकि जाने का शुभाशुभ दोनों है ।