देहरादून | उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें दो दिन बाद आज सोमवार से फिर तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करेंगे। वहीं, आज शाम को पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक भी है। बैठक में इस बात पर फैसला होगा कि उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन किया जाए या फिर मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत को आगामी चुनाव तक बरकरार रखा जाए। बता दें कि अगले साल 2022 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भी हैं। अगर पार्टी हाई कमान नेतृत्व परिवर्तन करने का मन बनाता है तो सूत्र बताते हैं कि सांसद अनिल बलूनी और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज रेस में सबसे आगे हैं।

त्रिवेंद्र के साथ कई विधायकों ने भी दिल्ली की दौड़ लगाई है। बता दें कि महिला दिवस के अवसर पर सीएम त्रिवेंद्र का आज ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में कार्यक्रम भी था। उत्तराखंड में शनिवार से भाजपा में मचे राजनीतिक भूचाल के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें काफी तेंज हो गई हैं। शनिवार को ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में  बजट सत्र के दौरान ही सीएम त्रिवेंद्र देहराूदन पहुंच गए थे। सीएम सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता सहित विधायकों ने शनिवार शाम को कोर कमेटी की बैठक में हिस्सा लिया था जिसमें झारखंड के पूर्व सीएम रमन सिंह सहित भाजपा प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम भी थे।  बैठक के बाद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर लगाम लगा दिया था लेकिन आज सोमवार को सीएम त्रिवेंद्र के दिल्ली रवाना होने के बाद अटकलों का बाजार दोबारा गर्म हो गय है। 
पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पिथौरागढ़ जिले की चार में से तीन विस सीटें भाजपा के पास हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में किसी को स्थान नहीं मिला है। वरिष्ठता पर कुमाऊं मंडल में पूर्व मंत्री, पार्टी के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष व डीडीहाट विधायक विशन सिंह चुफाल, कपकोट(बागेश्वर) विधायक और पूर्व मंत्री बलवंत सिंह भौर्याल, खटीमा के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से किन्ही दो को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है वहीं, गढ़वाल मंडल से एक विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है। इनमें बद्रीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट, विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान व हरिद्वार ग्रामीण के स्वामी यतीश्वरानंद के नाम शामिल हैं। 

नेता बदलने की भाजपा में पहले से परंपरा
भाजपा में मुख्यमंत्री बदलने की परंपरा उत्तराखंड के गठन से बाद से ही होती रही है। पहले नित्यानंद स्वामी को हटाकर उनके स्थान पर भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बना दिया गया था। फिर मेजर जनरल (अ.प्रा.) भुवन चंद्र खंडूड़ी के को हटाकर डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को सीएम बनाया गया था। इसके बाद फिर अगला चुनाव खंडूड़ी के नाम पर लड़ा गया। इसी तरह त्रिवेंद्र सिंह रावत को सीएम बने चार साल पूरे हो रहे हैं। 

बंट सकते हैं दायित्व 
भाजपा संगठन में कुछ और वरिष्ठ नेताओं को दायित्व दिए जा सकते हैं। विभिन्न आयोग, परिषद और निगमों में सरकार अब तक करीब 95 लोगों को दायित्व दे चुकी है पर इनमें कई जिलों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। माना जा रहा है कि भाजपा में चले सियासी तूफान के बाद सरकार सतर्क मोड पर है और असंतुष्ट सीनियर विधायकों को कैबिनेट में जगह देकर गुबार को शांत करने का प्रयास कर सकती है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पिथौरागढ़ जिले में चार में तीन विस सीटें भाजपा के पास हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में किसी को स्थान नहीं मिला है। वरिष्ठता के आधार पर कुमाऊं मंडल में पूर्व मंत्री, पार्टी के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष व डीडीहाट विधायक विशन सिंह चुफाल, कपकोट (बागेश्वर) विधायक व पूर्व मंत्री बलवंत सिंह भौर्याल, खटीमा के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से किन्ही दो को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है वहीं, गढ़वाल मंडल से एक विधायक को यह तोहफा मिल सकता है। इनमें बद्रीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट, विकासनगर विधायक मुन्ना सिहं चौहान व हरिद्वार ग्रामीण के स्वामी यतीश्वरानंद के नाम शुमार में हैं।