बिलासपुर । बिलासपुर में फर्जी क्लीनिक कितने बेलगाम चल रहे हैं कि वह दिन दूर नहीं जब क्लीनिक चलाने वाला बिना डिग्री का आदमी सर्जरी भी कर देगा और व्यवस्था यह सोच कर खुश रहेगी की महीना अच्छी रकम दे रहा है । बिलासपुर जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूरी पर सकरी मुख्य मार्ग पर इन दिनों दर्जनों क्लीनिक फर्जी तरीके से संचालित हैं। एक में कोई मंडल नाम का आदमी दवाई देना, पैथोलॉजी टेस्ट करना, ड्रिप चढ़ाना जैसे सब काम कर रहा है। मंडल का यह क्लिनिक मोबाइल दुकान में संचालित है यदि मंडल के पास कोई सक्षम डिग्री होती और वह पंजीकृत होता तो क्लीनिक के बाहर पंजीयन क्रमांक के साथ अपना नाम और योग्यता भी प्रदर्शित करता किंतु मंडल के पास ऐसा कुछ नहीं है उसके पास है तो गाली बकने वाला मुह जो अपने बारे में कुछ भी पूछने पर अपशब्दों की बौछार करता है। योग्य चिकित्सकों के पास नागरिक जाने में कतराते हैं क्योंकि उनकी समस्याएं कुछ ऐसी है जो बिना टेस्ट के इलाज के दायरे में नहीं आएंगी और आज तारीख के दिन कोई टेस्ट कराना नहीं चाहता तब मंडल ही उद्धारक है एक ही क्लीनिक में नवजात शिशु से गायनिक और बुजुर्गों तक का हर रोग का इलाज हो जाता है। यह अपने आप में मल्टीस्पेशलिटी मंडल है
इसी तरह सकरी में एक ऐसा क्लीनिक है जिसमें झोलाछाप बंगाली स्वयं शहर के बाहर है और अपने बाप के प्रतिनिधि के तौर पर बेटा आने वाले मरीज को दवाई देता है वह साफ शब्दों में कहता है मैं तो दवाई दे रहा हूं इलाज नहीं कर रहा हूं अब पिता पुत्र के अनोखी जोड़ी को कौन समझाए की दवा देना और इलाज करना अलग-अलग कैसे हो गया। पिता-पुत्र की जोड़ी का क्लीनिक भी बिना नाम के चलता है इनकी क्लीनिक के बाजू में दवा दुकान है दवा दुकान खोलते नहीं हैं क्लीनिक सही दवाई दुकान का काम चलता है इनके क्लीनिक में उसे ही दवा मिलेगी जो इनकी फीस देगा किंतु कहने के नाम पर यह इलाज नहीं करते सिर्फ दवा देते हैं इस तरह संसदीय सचिव के विधानसभा क्षेत्र में झोलाछाप क्लीनिक चल रहे हैं और विधायक कोविड अस्पतालों का निरीक्षण करते हैं।