• नासिक में 22 की मौत, देश में सैकड़ों जान खतरे में
  • मप्र, महाराष्ट्र, दिल्ली, यूपी, छग के कई अस्पतालों में चंद घंटों की ऑक्सीजन

नासिक/नई दिल्ली/भोपाल। देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमित मरीजों से अस्पतालों में हालात भयावह हो गए हैं। चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। महाराष्ट्र के नासिक में बुधवार को सरकारी अस्पताल में बड़ा हादसा हो गया। नगर निगम के जाकिर हुसैन अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक लीक हो गया। इसे रिपेयर करने में 30 मिनट का वक्त लगा और इतनी देर ऑक्सीजन सप्लाई रोक दी गई। इसके चलते 22 मरीजों की मौत हो गई और 35 की हालत अभी भी नाजुक है। वहीं मप्र, महाराष्ट्र, दिल्ली, यूपी, छत्तीसगढ के कई अस्पतालों में चंद घंटों की ऑक्सीजन बची है। इस कारण सैकड़ों लोगों की जान खतरे में है। नासिक के अस्पताल में 22 लोगों की मौत से पहले मप्र के शहडोल और भोपाल में ऑक्सीजन की कमी से पहले ही 25 लोगों की मौत के बाद अब देश के अन्य राज्यों में ऑक्सीजन की कमी के चलते सैकड़ों मरीजों की जान खतरे में पड़ गई है। महाराष्ट्र के पुणे, अहमदनगर सहित लगभग एक दर्जन से अधिक शहरों में चंद घंटों की ऑक्सीजन बची है। वहीं दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी किल्लत महसूस की गई है। उधर उत्तरप्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में अपने वहां ऑक्सीजन की कमी की बात कही है। अगर अस्पतालों में समय पर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होती तो सैकड़ों मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केन्द्र से कहा कि वे दिल्ली में ऑक्सीजन उपलब्ध कराए। कई अस्पतालों में मात्र 2 से 3 घंटे की ऑक्सीजन है। हालांकि के कुछ अस्पतालों में आपूर्ति शुरू कर दी गई है।

अस्पताल में 238 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर
नासिक में जिस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई रोकी गई उस वक्त 171 मरीज ऑक्सीजन पर और 67 मरीज वेंटीलेटर पर थे। ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी के मुताबिक, टैंक से आने वाले सप्लाई पाइप में लीकेज हुआ था। अभी इसे सुधार दिया गया है। इस लीकेज के दौरान 20 किलो लिक्विड ऑक्सीजन बर्बाद हुई। फिलहाल हॉस्पिटल के साथ जिला प्रशासन ने भी इस लीकेज की जांच शुरू कर दी है। हादसे पर गृह मंत्री अमित शाह ने संवेदना जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, नासिक के एक अस्पताल में ऑक्सीजन लीक होने से हुई दुर्घटना का समाचार सुन दुखी हूं। इस हादसे में जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनकी इस अपूरणीय क्षति पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। बाकी सभी मरीजों की कुशलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।

बहू को अपने सामने तड़पकर दम तोड़ते देखा
इस घटना में एक महिला की भी मौत हुई है। उसके ससुर ने बताया कि 4 दिन पहले अस्पताल लेकर आए थे। हालात में लगातार सुधार हो रहा था। लेकिन ऑक्सीजन सप्लाई रुकते ही तबीयत खराब होने लगी और उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि मैंने उसे अपनी आंखों के सामने तड़पता हुआ देखा। मैं इधर-उधर भाग रहा था, लेकिन कोई उसकी मदद के लिए नहीं आया। हॉस्पिटल प्रशासन भी कोई जवाब नहीं दे पाया।

मप्र में ऑक्सीजन सिलेंडर की लूटमार
देश में ऑक्सीजन के लिए किस तरह की मारामारी है इसका अंदाजा मंगलवार और बुधवार को दमोह में घटित घटना से लगाया जा सकता है। दमोह जिले में बुधवार को ऑक्सीजन सिलेंडर लूटने का मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में जब ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप पहुची तो कोविड वार्ड में मौजूद मरीजों के परिजनों ने सिलेंडरों को लूट लिया। बताया जा रहा है कि मंगलवार रात को और बुधवार सुबह दो बार हंगामे की ऐसी ही स्थिति बनी। परिजनों ने अस्पताल में तोडफ़ोड़ भी की और कर्मचारियों के साथ दुव्र्यवहार भी किया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा मांगी है। दमोह के जिला अस्पताल में जैसे ही ऑक्सीजन के सिलेंडरों की खेप पहुंची, वहां प्री कोविड वार्ड में मौजूद मरीजों के परिजनों ने सिलेंडर लूट लिए और एक-एक सिलेंडरों की जगह दो-दो सिलेंडर अपने पास रख लिए। लोगों का कहना था कि हमें अस्पताल पर भरोसा नहीं है। ऑक्सीजन सिलेंडरों को लूटने की खबर के बाद एएसपी शिवकुमार सिंह अपने दल-बल के साथ अस्पताल परिसर में पहुंच गए, जहां परिवार वालों पर दबाव बनाया गया, लेकिन परिवार वाले नहीं माने। एएसपी ने बताया कि सिलेंडर अस्पताल के भीतर ही हैं और मरीजों को लग रहे हैं। छीनकर ले जाने वाली बात नहीं है। सभी मरीजों को सिलेंडर की जरूरत है, इसलिए अस्पताल की ओर से ही सप्लाई की जानी चाहिए। इसके बाद एएसपी वहां से चले गए। सुबह जब सिलेंडरों की जरूरत पड़ी तो फिर से हंगामा होने लगा। जो मरीज सिलेंडर की मांग कर रहे थे, उन्हें प्री कोविड वार्ड से सिलेंडर लाने के लिए कहा गया, लेकिन वार्ड में जो लोग पहले से भर्ती थे, वे सिलेंडर देने को तैयार नहीं थे।

सिलेंडर वापस नहीं ला सकी पुलिस
मौके पर पुलिस पहुंची तो भी परिजनों ने सिलेंडर वापस नहीं दिए। बुधवार सुबह सिलेंडरों की जरूरत पड़ी तो हंगामा मचा। फिर पुलिस आई और लोगों से बातचीत की। लेकिन, लोग सिलेंडर देने को तैयार नहीं थी। उन्होंने कहा कि अस्पताल पर भरोसा नहीं है। किसी तरह पुलिस कुछ सिलेंडर ला पाई, लेकिन कई लोगों ने अभी भी सिलेंडर वापस नहीं किए हैं। एएसपी शिवकुमार सिंह ने बताया कि सिलेंडर अस्पताल के अंदर ही हैं और मरीजों को लग रहे हैं। छीन कर ले जाने वाली बात नहीं है। सभी मरीजों को सिलेंडर की जरूरत है इसलिए अस्पताल की ओर से ही सप्लाई की जानी चाहिए।